shivam singh Rajput

Monday, 24 August 2020

बेटी का जीवन................?

बेटी का जीवन................?
नाजुक कलियों सी होती है बेटियाँ,
जन्म के साथ ही कुछ घरों में छा जाता है मातम और कुछ घरों में खुशियां,
नाजुक कलियों सी होती है बेटियाँ,
कुछ पालते है पराई सी समझकर इन्हें,
कुछ के घर मे रहती है जैसे परियाँ,
आखिर क्यों ऐसा भेदभाव सहती है बेटियाँ,
आज ऊंची उड़ान उड़ने को बेताव है यह,
फिर क्यो इनके जन्म पर लगती है बंदिशें,
होती है शिकार व्यवस्था का हर जगह,
दुष्कर्म तक झेलती है बेटियाँ,
आज इस समाज मे दो तरह के लोग है,
एक तरफ बहू को बेटी मानते है लोग, एक तरफ दहेज के लिये जलती है बेटियाँ,
निर्णय खुद लेने का प्रयास तो करती है,
पर संस्कारो की चक्की में पिसती है बेटियाँ,
आओ एक ऐसा संसार बनाये जिसमे दहेज रूपी शब्द न हो खुशी खुशी ससुराल जाये यह बेटियाँ

शिवम सिंह राजपूत
   ((उत्तर प्रदेश))
   Mrshivam01