shivam singh Rajput

Tuesday, 26 March 2019

हमारे वीरों की अजय अमर गाथाओं को सुनियोजित तरीके से दफन कर दिया गया..


मैं आज फ़िल्म देखने गया था,,,जब से सिनेमा हॉल के बाहर निकला हुन मेरे मन मे कुछ सवाल क्रोन्ध रहे है ,,,कुछ तस्वीरें साफ हो रही है,,,कुछ चालें समझ भी आ रही है.
वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास के नाम पर हमें सिर्फ मुग़लों और गांधी-नेहरू परिवार की हफीम चटाई है,,ताकि ये क़ौम जाग न पाए,,इसे गुलाम बनाये रखा जा सके.हमें पाठ्यक्रम यूं पढ़ाया गया है मानो भारत का इतिहास मुग़लों से आरंभ हो कर गांधी-नेहरू पर खत्म हो जाता है...हमारे वीरों की अजय अमर गाथाओं को सुनियोजित तरीके से दफन कर दिया गया..मैंने कभी सारागढ़ी का नाम तक न सुना था न पढ़ा था,,या यूं  कहिए मुझ तक सारागढ़ी का नाम आने ही नहीं दिया गया.वो तो भला हो सोशल मीडिया का जिसने  हमें इस कैद से मुक्ति दिलाई... मैंने सारागढ़ी की जंग के विषय मे सर्वप्रथम सोशल के जरिये जाना ,,सोचिए,,,कितने ही गुमनाम सपूत होंगे जिनके बलिदान व पहचान को गांधी-नेहरू  के काले साये ने ढक लिया...
आखिर क्यों हमारे हीरो हमसे व हमारी पीढ़ियों से छुपा कर रखे गए??क्यों सारागढ़ी ,गुरु गोबिंदसिंह,गुरु तेग बहादुर,नेताजी,भगत सिंह जैसे बेशुमार घरतीपुत्रों के नामों से दूर रख कर  एक ही खानदान व एक ही परिवार को हम पर थोपा गया??हमें हमारे इतिहास से इसलिए अनभिज्ञ रखा गया ताकि हमारी पीढियां मानसिक 'गुलाम' रहें??? या कोई एक वर्ग विशेष नाराज न हो जाए?...
याद रहे जो इतिहास को मसलते है,,इतिहास उन्हें मसल देता है

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