Friday, 12 April 2019

एक बाप कन्यादान दान करता है जिसे "महादान" तक कहा जाता है

अपनी नई नवेली दुल्हन प्रिया को शादी के दूसरे दिन ही दहेज मे मिली नई चमाचमाती गाड़ी से शाम को रवि लॉन्ग ड्राइव पर लेकर निकला ! गाड़ी बहुत तेज भगा रहा था , प्रिया ने उसे ऐसा करने से मना किया तो बोला-अरे जानेमन ! मजे लेने दो आज तक दोस्तों की गाड़ी चलाई है , आज अपनी गाड़ी है सालों की तमन्ना पूरी हुई ! मैं तो खरीदने की सोच भी नही सकता था , इसीलिए तुम्हारे डैड से मांग करी थी !

प्रिया बोली :- अच्छा , म्यूजिक तो कम रहने दो ....आवाज कम करते प्रिया बोली ,तभी अचानक गाड़ी के आगे एक भिखारी आ गया , बडी मुश्किल से ब्रेक लगाते , पूरी गाड़ी घुमाते रवि ने बचाया मगर तुरंत उसको गाली देकर बोला-अबे मरेगा क्या भिखारी साले , देश को बरबाद करके रखा है तुम लोगों ने ,तब तक प्रिया गाड़ी से निकलकर उस भिखारी तक पहुंची देखा तो बेचारा अपाहिज था उससे माफी मांगते हुए और पर्स से 100रू निकालकर उसे देकर बोली-माफ करना काका वो हम बातों मे........कही चोट तो नहीं आई ? ये लीजिए हमारी शादी हुई है मिठाई खाइएगा ओर आर्शिवाद दीजिएगा ,कहकर उसे साइड में फुटपाथ पर लेजाकर बिठा दिया, भिखारी दुआएं देने लगा,गाड़ी मे वापस बैठी प्रिया से रवि बोला :- तुम जैसों की वजह से इनकी हिम्मत बढती है भिखारी को मुंह नही लगाना चाहिए,

प्रिया मुसकुराते हुए बोली - रवि , भिखारी तो मजबूर था इसीलिए भीख मांग रहा था वरना सबकुछ सही होते हुए भी लोग भीख मांगते हैं दहेज लेकर ! जानते हो खून पसीना मिला होता है गरीब लड़की के माँ - बाप का इस दहेज मे , ओर लोग.. तुमने भी तो पापा से गाड़ी मांगी थी तो कौन भिखारी हुआ ?? वो मजबूर अपाहिज या ..?? .

एक बाप अपने जिगर के टुकड़े को २० सालों तक संभालकर रखता है दूसरे को दान करता है जिसे कन्यादान "महादान" तक कहा जाता है ताकि दूसरे का परिवार चल सके उसका वंश बढे और किसी की नई गृहस्थी शुरू हो , उसपर दहेज मांगना भीख नही तो क्या है बोलो ..? कौन हुआ भिखारी वो मजबूर या तुम जैसे दूल्हे ....रवि एकदम खामोश नीची नजरें किए शर्मिंदगी से सब सुनता रहा क्योंकि....
प्रिया की बातों से पडे तमाचे ने उसे बता दिया था कि कौन है सचमुच का भिखारी......

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                      आपका धन्यवाद

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हम इस कहानी से कुछ सीख सकते है


मैं एक बार अपने किसी दोस्त के घर खाने पर गया हुआ था हम सब लोग नीचे फर्श पर बैठकर खाना खा रहे थे खाना परोसते वक्त अचानक उसकी माता जी का पैर सब्जी के बर्तन पर लग गया और कुछ सब्जी नीचे गिर गई और कुछ बर्तन में ही रह गई तो इस बात पर मेरे दोस्त ने कहा के मां ये सब्जी जो बर्तन में है उसको फैक देना और दुसरी सब्जी ले आओ उसकी माता जी ने ऐसा ही किया क्या करें मां जो थी फिर एक दिन मेरा वहीं दोस्त मुझे एक सत्संग समारोह में ले जाने की जिद करने लगा मैं उसके साथ चला गया मैंने वहां जाकर देखा के के वहां आते हुए सभी लोग एक बाबा के बारी सारी से पैर धो रहे थे और पैरों धूले पानी को पंचामृत कहकर पी रहे थे मेरे दोस्त ने भी ऐसा ही किया उसने मुझे भी ऐसा करने के लिए कहा तो मैंने इनकार कर दिया गुस्से में उसने मुझे जब दो बातें सुना दी मुझसे भी रहा नहीं गया और मुझे उस दिन खाना खाते वक्त कि घटना याद आ गई मैंने उससे कहा के भाई एक बात बता के तू इस बाबा के पैर धो रहा है और फिर वो पानी पी रहा है लेकिन ये बताओ के उस दिन जब तेरी माता जी का पैर सब्जी पर लग गया था क्या उस दिन अपनी मां के पैर धोये थे वो सब्जी अम्रत समझ कर खाई थी इस बात का कोई जवाब है तेरे पास और उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था फिर मैंने उसे जवाब दिया ऐसा न करने का कारण है तेरा अन्धविश्वास जो इस बाबा पर तु कर रहा है जिस बाबा को तु ठीक से जानता भी नहीं लेकिन जो मां तुझे बरसों से पाल रही है उसके पैरो लगी सब्जी तुझे बेकार लगी ऐसा कयु ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि तुझे इस बाबा से तो प्यार है मगर अपनी मां से नहीं
शायद मेरी बात उसके समझ में आ गई थीं क्योंकि उसकी आंखों में आसूं आ गये थे मैं उसके आंसुओं को देखकर वहीं चुप हो गया आगे कुछ नहीं कह पाया ............

                       ( धन्यवाद)
                                                
                                          * शिवम *
                                            

जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ नया कर रही है

कभी हर सपना पूरा तो कभी सब कुछ धुवा कर रही हैं       जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ नया कर रही है कभी तो समझ आती है जिन्दगी कि हर चाल कभी मालूम ही नहीं चलता के ये क्या कर रही है आस  कुछ होती है मिलता कुछ और है इस कलयुग में हम बोते कुछ और है निकलता कुछ और है समभावनाय जीने कि आस बढ़ाती है निराशाएं सब कुछ छोड़ जाने को कहती हैं मजबुर इन्सान सब कुछ करने को तैयार है ये ज़िन्दगी जो उससे करा रही है कभी हर सपना पूरा तो कभी सब कुछ धुवा कर रही है जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ नया कर रही है
टुटे हुए सपने  ही जिन्दगी से लडना सिखाते हैं
और कभी ये ही सपने जिन्दगी से डरना सिखाते हैं
हाथों पे हाथ रख बैठने से भी कुछ नहीं होता
और कभी कभी बहुत कुछ करने से भी कुछ नहीं होता
हर इंसान को उन्हीं रास्तों पर चलना पड़ता है जो रास्ता ये ज़िन्दगी दिखा रही है कभी हर सपना पूरा तो कभी सब कुछ धुवा कर रही है जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ नया कर रही है कुछ लोग ये कयु कहते हैं अच्छे के साथ बुरा होता है और कुछ लोग ये कयु कहते हैं कि बुरे के साथ बुरा होता है दोनों में से न जाने कोन सही है किसी को मालूम नहीं बस वही सच है दोस्तों जो ये ज़िन्दगी हमको यां तुमको दिख रही है कभी हर सपना पूरा तो कभी सब कुछ धुवा कर रही है जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ नया कर रही है।
                                                                                      (मेरी कलम से)