Friday, 12 April 2019

हम इस कहानी से कुछ सीख सकते है


मैं एक बार अपने किसी दोस्त के घर खाने पर गया हुआ था हम सब लोग नीचे फर्श पर बैठकर खाना खा रहे थे खाना परोसते वक्त अचानक उसकी माता जी का पैर सब्जी के बर्तन पर लग गया और कुछ सब्जी नीचे गिर गई और कुछ बर्तन में ही रह गई तो इस बात पर मेरे दोस्त ने कहा के मां ये सब्जी जो बर्तन में है उसको फैक देना और दुसरी सब्जी ले आओ उसकी माता जी ने ऐसा ही किया क्या करें मां जो थी फिर एक दिन मेरा वहीं दोस्त मुझे एक सत्संग समारोह में ले जाने की जिद करने लगा मैं उसके साथ चला गया मैंने वहां जाकर देखा के के वहां आते हुए सभी लोग एक बाबा के बारी सारी से पैर धो रहे थे और पैरों धूले पानी को पंचामृत कहकर पी रहे थे मेरे दोस्त ने भी ऐसा ही किया उसने मुझे भी ऐसा करने के लिए कहा तो मैंने इनकार कर दिया गुस्से में उसने मुझे जब दो बातें सुना दी मुझसे भी रहा नहीं गया और मुझे उस दिन खाना खाते वक्त कि घटना याद आ गई मैंने उससे कहा के भाई एक बात बता के तू इस बाबा के पैर धो रहा है और फिर वो पानी पी रहा है लेकिन ये बताओ के उस दिन जब तेरी माता जी का पैर सब्जी पर लग गया था क्या उस दिन अपनी मां के पैर धोये थे वो सब्जी अम्रत समझ कर खाई थी इस बात का कोई जवाब है तेरे पास और उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था फिर मैंने उसे जवाब दिया ऐसा न करने का कारण है तेरा अन्धविश्वास जो इस बाबा पर तु कर रहा है जिस बाबा को तु ठीक से जानता भी नहीं लेकिन जो मां तुझे बरसों से पाल रही है उसके पैरो लगी सब्जी तुझे बेकार लगी ऐसा कयु ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि तुझे इस बाबा से तो प्यार है मगर अपनी मां से नहीं
शायद मेरी बात उसके समझ में आ गई थीं क्योंकि उसकी आंखों में आसूं आ गये थे मैं उसके आंसुओं को देखकर वहीं चुप हो गया आगे कुछ नहीं कह पाया ............

                       ( धन्यवाद)
                                                
                                          * शिवम *
                                            

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